करौली दंगे पर भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)तथ्यान्वेषण दल की रिपोर्ट जारी


बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर (रिपोर्ट : आशा पटेल ) । भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी की ओर से एक तथ्यान्वेषण दल ने पार्टी के विधायक दल के नेता का. बलवान पूनिया और डॉ.संजय‘‘माधव‘‘ के नेतृत्व में करौली का दौरा किया। इस दौरान करौली के जिला प्रशासन से प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और दंगा के दौरान और उसके बाद के घटनाक्रम के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी हासिल की। इसके पश्चात् घटना के बारे में मौका स्थल का दौरा करते हुए आमजन और दंगा के दौरान पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात कर समस्त जानकारी हासिल की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जली हुई व गिराई हुई दुकानों को देखा। घटनास्थल का मुआयना किया। इस बारे में जो जानकारी निकल कर के आई उसके बारे में जानकारी देते हुए माकपा विधायक दल के नेता कॉ. बलवान पुनिया और डॉ संजय माधव ने पत्रकारों को बताया कि :-

1- करौली में 2 अप्रेल 2022 को जो साम्प्रदायिक दंगे की घटना हुई उसकी गहन पड़ताल से यह स्पष्ट होता है कि यह घटना पूरी तरह से प्रायोजित और सुनियोजित रूप से अंजाम दी गई थी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी.नड्डा के पिछले दिनों किये गये राजस्थान दौरे के दौरान पूर्वी राजस्थान में पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के कमजोर प्रदर्शन को रेखाकिंत करते हुए इस ईलाके पर ध्यान केन्द्रित करने की बात कही गई थी। उसके तुरंत बाद करौली हिंसा को अंजाम दिया गया। :-करौली के आमजन व प्रषासनिक अधिकारियों से बातचीत से और मौका मुआयना से यह पता लगता है कि इस ईलाके में सभी धर्म, सम्प्रदाय के लोग अत्यंत शांति सदभाव और भाईचारे के साथ रहते आये है और शहर के अन्दर रिहायष और बाजार में दुकानें भी सभी समुदायों की मिली-जुली है। पूरा ईलाका जहां घटनाएं घटी वो बहुत ही सघन आबादी और संकड़ी गलियों वाला ईलाका है। जिसमें मिली जुली आबादी और इसी प्रकार मिले जुले व्याव्सायिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं। सबसे पहले तो ऐसे ईलाके मे शोभा यात्रा निकालने की अनुमति प्रदान करना प्रषासनिक तंत्र की विफलता और लापरवाही की ओर ईषारा करता है। शोभा यात्रा से पूर्व, शोभा यात्रा के दौरान जिस प्रकार की अफवाहे शहर में फैलाई गई, अल्पसंख्यक समुदाय में शंका और भय पैदा करने की चेष्टा की गई। उससे एक सुनियोजित तरीके से दोनो समुदायों के बीच असुरक्षा, भय और अविष्वास पैदा करने का सफल प्रयास किया गया। प्रशासनिक अमला या तो इस षडयंत्र को समझ पाने में विफल रहा अथवा जाने अनजाने में वो इसका हिस्सा बन गया। अंदेषा यह भी है कि प्रशासनिक अमले में भी साम्प्रदायिक ताकतों की घुसपैठ हो चुकी है।  

2- शोभा यात्रा पर कथित पथराव की घटना के पहलुओं की पड़ताल करने से यह स्पष्ट होता है कि इस घटना के तुरंत बाद जिस प्रकार से सैंकड़ो दुकानों के बीच में से चिन्हित कर-करके सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय की दुकानों को पेट्रोल और अन्य अत्यंत ज्वलनषील पदार्थ डालकर बुरी तरह से जलाया गया। उस ईलाके की स्थिति का विश्लेषण करने से यह स्पष्ट होता है कि घटना के तुरंत बाद जिस प्रकार दुकानों को चिन्हित कर जलाया गया। उसके लिए इन दंगाई तत्वों ने पूर्व में ही तैयारी की हुई थी और शोभा यात्रा के दौरान ये तत्व ज्वलनशील पदार्थ साथ में लेकर गये थे और वाकायदा अल्पसंख्यक समुदाय की दुकानों को चिन्हित कर रखा था, ठीक वैसे ही जैसे गुजरात के दंगों में और 2 अप्रेल 2018 में हिन्डौन में दलितों के घरों और दुकानों को चिन्हित करके चुन-चुन कर जलाया गया था।  


3- शोभा यात्रा के दौरान भड़काऊ नारे लगाये गये, संवेदनशील ईलाको से शोभा यात्रा को निकलने देने की अनुमति देना, इतनी बड़ी तादाद में लोगों को एकत्रित होने देना शोभा यात्रा के साथ में पर्याप्त मात्रा में पुलिस बलों का ना होना, शौभा यात्रा से पहले ही शहर में लाठियों, हथियारों की खरीद की अफवाहें फैलना आदि तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि यह घटनाक्रम पूर्णतया सुनियोजित था और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के मंसूबे के तहत इसे अंजाम दिया गया। साम्प्रदायिक धु्रवीकरण से राजनीतिक लाभ लेने की चिरपरिचित आजमाई हुई शैली के रूप में इसे इस्तेमाल किया गया। 

4-पुलिस बलों और प्रशासन की मौजूदगी में दुकानों को जलाया गया और प्रशासन रोक पाने में विफल रहा। बल्कि रोकने का कोई प्रयास नहीं किया।  

5- इस घटना के लिए भाजपा, आर.एस.एस. जैसे साम्प्रादायिक तत्वों ने काफी पहले से पूरी तैयारी के साथ इसे अंजाम दिया गया और करौली जैसे शांतिपूर्ण ईलाके में ये ताकतें अत्यंत मेल-जोल के साथ रह रहे समुदायों के बीच अविश्वास और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करने में सफल हो गये है। 

6- अल्पसंख्यक समुदायों  और कुछ अन्य ईलाकों में कुछ बहुसंख्यक समुदायों के छोटे व्यवसायियों की सम्पति को जलाकर नष्ट किया गया है। जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ वहां के नागरिकों के बीच आपसी सम्बंधों में भारी खटास पैदा होने का अंदेषा है। लगभग सभी पीड़ित जिनकी सम्पति का भारी नुकसान हुआ है निम्न मध्यवर्गीय छोटे दुकानदार है। अतः सी.पी.आई.एम. का प्रतिनिधिमंडल सरकार से मांग करता है कि जिन व्यक्तियों की सम्पतियां नष्ट हुई है। उन्हें तुरंत उनका पूर्ण मुआवजा दिया जाये। जिससे कि वे पुनः अपना काम-धंधा शुरू कर जीवनयापन कर सकें। आज भी अल्पसंख्यक समुदाय की अनेक दुकानों को प्रषासन ने बंद कर रखा है जबकि आस-पास के ईलाके की अन्य दुकानें खुल चुकी है। अतः शीघ्र कार्यवाही करते हुए इन दुकानों को भी खोलकर सामान्य स्थिति बहाल की जावें। 

7- दंगे के सभी दोषियों और षडयंत्रकारियों की पहचान करते हुए वो चाहे किसी भी समुदाय के हो, उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायें। 

8-प्रशासनिक विफलता के लिए जिम्मेवार अधिकारियों कर्मचारियों की पहचान करते हुए इनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जावें। 

9- भविष्य में इस तरह कि घटनाओं की पुनरावृति को रोकने के लिए राज्य के सभी हिस्सों में खुफिया तंत्र और प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय करते हुए आर.एस.एस. और अन्य सभी साम्प्रदायिक संगठनों की गतिविधियों की सुक्ष्मतापूर्वक निगरानी रखी जावें और उनकी गोपनीय गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए जनता के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए उनकी पोल खोली जावें। आर.एस.एस. और अन्य धार्मिक संगठनों द्वारा संचालित किया जा रहे स्कुलों,कॉलेजों और अन्य संस्थाओं की आंतरिक गतिविधियों की निष्पक्ष जांच करवाते हुए इन संस्थाओं की सम्पतियों, उनकी गतिविधियों, पढ़ाये जा रहे पाठयक्रमों, वहां कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों को किये जा रहे भुगतान और सेवा शर्तो की राज्य सरकार द्वारा गहन जांच कराने की आवश्यकता है। क्योंकि शिक्षा की आड़ में इन संस्थाओं में मासूम बच्चों के दिमागों में जहरीली साम्प्रदायिक विचारधारा की जहर भरा जा रहा है। साथ ही साथ ये संस्थाये अपने कार्मिकों का भी आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न करते है। चूंकि इन संस्थाओं को सरकारों ने फ्री में अथवा नाममात्र की कीमत पर बेषकीमती जमीनें बांटी है। कई स्थानों को सेवा के नाम पर हासिल की गई।इस सम्पति का व्यावसायिक दुरूपयोग भी किया जा रहा है। 

इन सभी संस्थाओं में संविधान के धर्मनिष्पेक्षता,समाजवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों की पालना सुनिष्चित करने के लिए राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। 

10-साथ ही इन संगठनों की गतिविधियों पर भी सरकार को निगरानी रखते हुए सरकारी संस्थाओं, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों जैसे पार्क,स्टेडियम,मंदिर,मस्जिद, गुरूद्वारे आदि किसी भी धर्मस्थल का इस्तेमाल साम्प्रदायिकता और सामाजिक वैमनस्य फैलाने के लिए प्रयोग करने से रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। 

11-राज्य सरकार जनता के बीच साम्प्रदायिक एवं सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलायें और साम्प्रदायिक, जातिवादी, आपराधिक तत्वों के बीच यह कठोर संदेष भेजे कि यदि कोई भी तत्व सामाजिक सदभाव, भाईचारे को तोड़ेगा तो उसे बक्षा नहीं जायेगा और जिस क्षेत्र में इस तरीके की घटना घटेगी उस ईलाके के प्रषासनिक और पुलिस अधिकारियों को इसका जिम्मेवार माना जायेगा। 

12— प्रशासनिक अमले और पुलिस विभाग की स्क्रीनिंग करते हुए इनमें घुसपैठ किये हुए साम्प्रदायिक -जातिवादी तत्वों पहचान करते हुए उन्हे तुरंत प्रभाव से फील्ड पोस्टिंग से हटाया जाये और संविधान विरोधी गतिविधियों के लिए इनके खिलाफ यथोचित कानुनी कार्यवाही करते हुए प्रषासनिक तंत्र इस तरह रूढिवादी, साम्प्रदायिक तत्वों से मुक्त किया जाये। 


प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही राज्य के गृहमंत्री और मुख्यमंत्री श्री अषोक गहलोत से मुलाकात करके उन्हें अपनी रिपोर्ट सौपेंगा और ठोस कदम उठाने की पील करेगा। प्रतिनिधिमंडल में युवा नेता संदीप सिहाग, भुपेन्द्र झुरिया, राजकुमार बेरड़ भी शामिल थे। 


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