संत हरबंश सिंह निर्मल को मरणोपरांत प्रदान किया जाएगा स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार


बैस्ट रिपोर्टर न्यूज (अमित राजपूत)। नई दिल्ली/राठ ।  गुरुवार को स्वामी ब्रह्मानंद की समाधिभूमि राठ में वर्ष 2022 के लिए स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार की घोषणा की गयी। यह पुरस्कार इस वर्ष शिक्षा और गौसेवा दोनों के लिए संत हरबंश सिंह निर्मल को मरणोपरांत प्रदान किया जाएगा। वह भादरिया जी महाराज के नाम से प्रसिद्ध हैं।

संत भादरिया ने राजस्थान से सटी पाकिस्तानी सीमा पर गायों की तस्करी की रोकथाम की। अकाल के दौर में लाखों गौवंशों को संरक्षण देकर उन्हें मौत के मुँह से बचाया। आज भी श्रीजगदंबा समिति में लगभग पैंतालीस हजार उपेक्षित गौवंशों मसलन साँड़-बैलों का संरक्षण हो रहा है। उन्होंने इसके अलावा भारत की प्रख्यात गिर एवं थारपारकर नस्लों के गौवंशों का संवर्धन केन्द्र भी स्थापित किया।

संत भादरिया द्वारा राजस्थान के चौदह जिलों के पंचायत मुख्यालयों एवं विद्यालयों में लगभग चार हजार पुस्तकालयों की स्थापना करवाई गई। राजस्थान के पोखरण में मौजूद एशिया के सबसे बड़े वाचनालय के निर्माण का प्रतिमान भी इन्होंने स्थापित किया, जो आज राष्ट्र की एक धरोहर है। 

पुरस्कार समिति के कार्यकारी अध्यक्ष मनोहर सिंह ने वर्ष 2022 के लिए पुरस्कार की घोषणा करते हुये बताया कि जुगल किशोर आसेरा के प्रस्ताव पर स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार समिति ने सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया। यह पुरस्कार स्वामी ब्रह्मानंद जी के निर्वाण-दिवस 13 सितम्बर को राठ-हमीरपुर (उ. प्र.) में संत भादरिया द्वारा स्थापित श्री जगदंबा सेवा समिति के मंत्री को सौंपा जायेगा।

स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार शिक्षा और गौसेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले भारतीय व गैर भारतीय नागरिकों को प्रदान किया जाता है। पुरस्कार स्वरूप विजेता को दस हज़ार रुपये, स्वामी ब्रह्मानंद की कांस्य प्रतिमा, एक कांस्य पदक, अंगवस्त्र और सनद प्रदान किया जाता है। इससे पहले ये पुरस्कार गौसेवा के क्षेत्र में जर्मनी की फ्रेडरिक ईरीना ब्रूनिंग को तथा शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. अरुण प्रकाश व सुपर-30 फेम आनन्द कुमार को प्रदान किया जा चुका है।


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