खुला पत्र : अशोक गहलोत (मुख्यमंत्री,राजस्थान) को

विषय : जनता को भयभीत करने व बिना गारंटी टीकाकरण हेतु बाध्य करने संबंधी बयान व निर्देश               



सम्माननीय, 

अशोक गहलोत जी 

इस खुले पत्र के माध्यम से मैं आपको बताना चाहता हूँ कि आप जनहित के भ्रम में फॉर्मा कम्पनियों के वकील की तरह काम कर रहे हैं तथा जनता को भ्रमित करके जबरन टीकाकरण को प्रोत्साहित कर रहे हैं।  

महोदय कल दिनांक 9 जनवरी 2022 को राजस्थान सरकार के गृह विभाग द्वारा 'महामारी सतर्क—सावधान जन—अनुशासन दिशा निर्देश' संशोधित रूप में जारी किया गया।

दिशानिर्देशों में विशेषज्ञों की राय की आड़ लेते हुए बड़ी ही चालाकी से ये बताया गया है कि जिन्होंने कोविड़ वैक्सीन की दोनों डोज ले रखी है उनमें कोरोना के नए वैरिएंट(ओमीक्रोन) से संक्रमित होने पर हास्पिटलाईजेशन (आक्सीजन व आईसीयू) की आवश्यकता कम देखी जा रही है।

ध्यान रहे आप ये नहीं कह रहे हैं कि लोग संक्रमित नहीं होगें, आप ये कह रहे हैं कि आप संक्रमित तो हो सकते हैं परन्तु अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। संक्रमित नहीं होने की बात तो  वैसे ही असत्य हो जाती क्योंकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी आप स्वयं 29 अप्रेल 2021 के बाद 8 जनवरी 2022 को पुन: दूसरी बार संक्रमित हो गए हैं। जहां तक वैक्सीन की डोज के बाद हास्पिटलाईजेशन (आक्सीजन व आईसीयू) नहीं होने की बात है वो तर्क भी आपका असत्य सिद्ध हो जाता है क्योंकि आप स्वयं कुछ दिन पूर्व ही अगस्त 2021 में अस्पताल जा चुके हैं।

गहलोत साहब आपको मालूम होना चाहिए कि ओमिक्रोन के मामले में 98 प्रतिशत लोगों को तो वैसे भी हास्पिटलाईजेशन (आक्सीजन व आईसीयू) की आवश्यकता नहीं पड़ रही है, फिर चाहे वो वैक्सीनेटेड हो या वैक्सीनेटड ना हो । आपकी ही टास्क फोर्स के डॉ.सुधीर भण्डारी का बयान छपा था कि ओमीक्रोन इम्यूनिटी बढ़ा रहा है, यदि ओमीक्रोन प्रतिरोधकता बढ़ा रहा है तो परेशानी क्या है, डर क्यों फैला रहे हो, आप लगातार संक्रमित केसों की संख्या गिना कर लोगों में भय पैदा कर रहे हो लेकिन रोग की गम्भीरता के प्रमाण बताते हैं कि कुछ नहीं है,सामान्य वायरल सर्दी जुकाम है,दो चार दिन में घरेलू उपचार से ही स्वत: ठीक हो जाता है । 

मुख्यंमंत्री जी क्या आप सिर्फ टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने के लिए इतना बड़ा झूठ बोल रहे हैं ? या आप स्वयं भ्रमित हैं ? यदि हमारा प्रश्न गलत है तो कृपया आंकड़े जारी कर सिद्ध करें कि लोगों को भारी मात्रा में हास्पिटलाईजेशन (आक्सीजन व आईसीयू) की जरूरत पड़ रही है और वो भी उन लोगों को जो कि अभी तक वैक्सीनेटेड नहीं हैं। 

आपका व आपकी टॉस्क फोर्स के डॉक्टर्स का कहना है कि वायरस म्यूटेन्ट हो गया है, यदि वायरस ने नया रूप धारण कर लिया है तो पुराना टीका नए वायरस पर कैसे काम करेगा ? आपके पास इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण है क्या ? 

आप जो टीका लगवाने को कह रहे हैं वो तो तब बना था जब पहली लहर का शगूफा छोड़ा गया था। एक कमाल और हो रहा है पुराने किट से ही ओमिक्रोन को भी ढूंढा जा रहा है और वो मिल भी रहा है।

गहलोत साहब मुझे लगता है कि आप जिन्हें विशेषज्ञ बता रहे हैं उनमें से लगभग सभी प्रसिद्ध डॉक्टर हो सकते हैं, वे वैज्ञानिक नहीं हैं,ना ही उनकी कोई रिसर्च लैब है । वे जो बात आपको बताते हैं वो सरकारी या सरकार से लाभ प्राप्त मुलाजिम के तौर पर सिर्फ अपनी निजी राय के रूप में झिझकते हुए बताते हैं,उनकी राय के पीछे अक्सर किसी भी प्रकार का व्यापक वैज्ञानिक शोध का प्रमाण नहीं होता है। यदि ऐसा नहीं है तो क्या आपने उनसे कोई प्रमाण मांगा ? 

हाल ही में आपने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि अगस्त 2021 में आपके स्वयं के हार्ड की आर्टरी में ब्लॉकेज की वजह पोस्ट कोविड़ समस्या थी,आपके इसी स्टेटमेंट के प्रकाश में मैं आपसे कहना चाहूंगा कि महोदय आप स्वयं भ्रमित हैं,आपके आसपास के डॉक्टरों ने जानबूझकर या अनजाने में या आपके पद के दबाब में आकर आपको भ्रमित कर दिया है, दरअसल आप जिसे पोस्ट कोविड़ प्रभाव बता रहे हैं या समझ रहे हैं वो उस वैक्सीन का प्रभाव हो सकता है जो आपने स्वयं लगवाई है तथा पूरे राजस्थान को ठोकने का असंवैधानिक आदेश दे रहे हैं वो भी जबानी, लिखित में शब्दों की बाजीगरी खेली जा रही है। आपको जादूगर कहा जाता है परन्तु मुझे लगता है कि आपकी जादूगरी किसी अंतराष्ट्रीय गैंग के षड़यंत्र के आगे गच्चा खा गई है,मैं ये बात यूं ही नहीं कह रहा हूँ वैक्सीन निर्माता कम्पनी ने अपनी वैक्सीन के साईड इफेक्टस में ये बात बिलकुल स्पष्ट शब्दों में लिख रखी है। ईश्वर का शुक्र है कि आप आज भी हमारे बीच में हैं परन्तु देश दुनिया के लाखों लोग ऐसे हैं जो इतने खुशकिस्मत नहीं रहे कुछ दिन पूर्व ही समाचार—पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक 2020 से 31 अगस्त 2021 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार दुनिया की 800 करोड़ की आबादी में से सबसे अधिक 89 लाख मौंतें हार्ट की वजह से एवं उससे कम 62 लाख मौतें स्ट्रोक से हुई ,कोरोना से मरने वाले कुल मौतों में से मात्र 4.6 प्रतिशत ही रहे हैं। 500 से अधिक डॉक्टर मर चुके हैं वो भी वैक्सीन के दो डोज के बाद,जरा आईसीएमआर से पूछ कर तो देखा,डॉ.के.के.अग्रवाल भी ऐसे ही बेमौत मरे तो उसपर पोस्ट कोविड़ का टैग लगा दिया, आप प्रचार कर रहे हैं वैक्सीन के बाद हास्पिटलाईजेशन (आक्सीजन व आईसीयू) की आवश्यकता नहीं पड़ती है। 

राजस्थान में हाल ही में प्रकाशित सीरो सर्वे बताता है कि बिना वैक्सीन के भी आम आदमी (सर्वे सैम्पल साईज 15120) के शरीर में 90 प्रतिशत तक एन्टीबॉडी बन चुकी हैं,वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि प्राकृतिक इम्यूनिटी कृत्रिम इम्यूनिटी से करीब 13 गुना अधिक प्रभावशील होती है, यदि ऐसा है तो टीकाकरण के माध्यम से अधिकतम 6—8 माह तक प्रभावी होने का दावा करने वाली कम्पनियों की कृत्रिम इम्यूनिटी देने की हडबड़ी में सरकार आखिर क्यों है? याद रहे कम्पनी का सिर्फ दावा है वास्तविकता अलग है,कम्पनी चालाकी से रिलेटिव रिस्क रिडक्शन को हाईलाईट किया तथा एबसल्यूट रिस्क रिडक्शन को छिपा लिया जोकि यह बताता है कि जिन वैक्सीनस की प्रभावशीलता 65 से 95 प्रतिशत बताई जा रही है वो वास्तव में 0.84 से लेकर मात्र 1.3 प्रतिशत के बीच ही है। सच्चाई ये है कि टीका कम्पनी सिर्फ इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर टीका बेच रही हैं वो भी भ्रामक दावे करके। क्या प्राकृतिक रूप से इम्यूनिटी का कोई तरीका नहीं है, क्या कोविड़ से पहले हजारों सालों से मानव इन कम्पनियों के टीके की ही प्रतीक्षा कर रहा था।

हाल ही आपके दो बयान समाचार—पत्रों में छपे हैं——1.'किसी को भी टीकाकरण से मना करने का अधिकार नहीं है , 2. बिना वैक्सीन के लोग घरों से बाहर नहीं निकल सकेंगें ।

गहलोत साहब आप जैसे गांधीवादी से और बात बात में संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देने वाले व्यक्ति से इस प्रकार की असंवैधानिक व गैर लोकतांत्रिक वक्तव्य की हमें बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी। पिछले दिनों आए आपके इस प्रकार के स्टेटेमेंट अवैज्ञानिक व अतार्किक तो हैं ही वे असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक,नागरिक अधिकारों को कुचलने वाले व तानाशाहीपूर्ण हैं। 

मैं आपको बताना चाहूंगा कि ———

(1)  केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लिखित हलफनामा दिया है कि भारत में वैक्सीन स्वैच्छिक है,अनिवार्य नहीं है । डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 55 के अनुसार बतौर राज्य ,राजस्थान सरकार भी केन्द्र सरकार के उक्त वक्तव्य से बंधी हुई है। कोई भी राज्य सरकार या उसका कोई भी पदाधिकारी इसके विपरीत कोई भी आदेश,निर्देश या वक्तव्य  जारी नहीं कर सकता है। 

(2) जबरन टीकाकरण के संबंध में दिया गया आपका बयान भारतीय संविधान के तहत भारत के प्रत्येक नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। सरकार जिस डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट व महामारी अधिनियम के तहत तानाशाही करने की कोशिश कर रही है वो भी संविधान के अंतर्गत ही आते हैं तथा देश के किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का खत्म नहीं कर सकते हैं। 

(3) आसाम,मेघालय एवं गोहाटी उच्च न्यायालयों के द्वारा भी अपने निर्णयों में स्पष्ट आदेश दिया गया है कि टीकाकरण के स्टेटेस के आधार पर सरकार किसी भी नागरिक के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं कर सकती है क्योंकि आज तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण या सर्वमान्य शोध  सामाने नहीं आया है जो यह सिद्ध कर सके कि टीकाकृत व्यक्ति संक्रमण नहीं फैला सकता है या टीकाकृत व्यक्ति कोरोना से संक्रमित नहीं हो सकता है।

(4) इस सबके बावजूद भी यदि आप गारंटीपूर्वक ये कहते हो कि टीकाकरण अनिवार्य है , टीका पूर्णत: सुरक्षित है,टीकाकरण ही इम्यूनिटी बढ़ाने का एकमात्र उपाय है तो मेरी आपसे व आपकी सरकार से चार मुख्य मांग हैं——


1.प्रत्येक नागरिक का प्री—वैक्सीनेशन व पोस्ट वैक्सीनेशन एन्टीबॉड़ी टैस्ट अनिवार्य किया जाए ताकि ये सिद्ध हो सके कि वैक्सीनेशन से फायदा हो रहा है और आपका व टीका कम्पनियों का दावा सही है ताकि जनता में भ्रम दूर हो और वे टीकाकरण से झिझके नहीं। 


2. टीकाकरण से पूर्व प्रत्येक नागरिक को टीके के उन दुष्प्रभावों की जानकारी देकर लिखित अनुमति लेना अनिवार्य किया जाए जिन दुष्प्रभावों का जिक्र स्वयं टीका निर्माता कम्पनी ने किया है, दुष्प्रभावों की जानकारी के बावजूद टीके के लिए सहमत लोगों को ही टीका लगाया जाए । झूठ बोलकर या मजबूर करके किसी भी नागरिक को टीका ना दिया जाए व बिना सहमति टीकाकरण करने वालों पर हत्या के प्रयास का तथा इस प्रकार के आदेश देने वालों पर हत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया जाए। 


3. टीकाकरण से पूर्व प्रत्येक व्यक्ति को ,टीकाकरण के बाद होने वाली अनहोनी की स्थिति में सरकार की ओर से कम से कम 50 लाख रूपये मुआवजे की लिखित गारंटी दी जाए क्योंकि सरकार की गारंटी व जबरदस्ती के चलते ही नागरिक टीकाकरण को तैयार हो रहे हैं अत: सरकार की गारंटी,प्रचार व जबरदस्ती के चलते होने हुए टीकाकरण के बाद होने वाले प्रत्येक दुष्परिणाम के लिए भी सरकार ही जिम्मेदार होगी।


4. टीकाकरण के धुआंधार प्रचार की तर्ज पर ही टीकाकरण के बाद होने वाले प्रत्येक छोटे से छोटे दुष्प्रभाव को दर्ज करने की आसान व्यवस्था की जाए और उस व्यवस्था का भी धुआंधार प्रचार किया जाए ताकि जनता अपने साथ होने वाले दृष्प्रभावों को दर्ज कर सके । सरकार को चाहिए कि इस व्यवस्था से प्राप्त दुष्प्रभावों के आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाए ताकि दूध का दूध व पानी का पानी हो सके तथा वैक्सीनहेजिटेंसी समाप्त हो । 


अशोक गहलोत जी आप संवेदनशील इंसान हैं परन्तु पूंजीवादियों व विदेशी ताकतों के षड़यंत्रों को समझना भी जरूरी है,बिना प्रमाण के किसी की निजी राय के आधार पर लोगों को टीकाकरण के लिए बाध्य करना ना सिर्फ अवैज्ञानिक ,अतार्किक , अविवेकपूर्ण और सरासर गलत है वरन् आपका यह प्रयास असंवैधानिक ,अलोकतांत्रिक,तानाशाहीपूर्ण और नागरिक अधिकारों का बेशर्म दमन है । 

उम्मीद है,आप मेरे विचारों एवं टीकाकरण के संबंध में की गई मेरी मांगों पर सकारात्मक ढंग से विचार करते हुए ही राजस्थान में टीकाकरण के विषय में दिशानिर्देशों को संशोधित रूप से जारी करवाने का श्रम करेंगें,और किसी भी सूरत में बिना गारंटी व प्रमाण के टीकाकरण को नागरिकों पर नहीं थोपेंगें । 

वैसे मेरी ओर आपकी कोई तुलना नहीं है,मैं एक मामूली सा पत्रकार हूँ,लोकतंत्र व नागरिक अधिकारों की सुदृढ़ता के लिए काम करना ही मेरा काम है परन्तु फिर भी मुझे उम्मीद है कि आप मेरे शब्दों में प्रकट की गई जनता की आशंका का निराकरण करेंगें व मुझे भी अपनी प्रतिक्रिया से अवगत करावेंगें ।


शुभेच्छु!


अनिल यादव

सम्पादक,बैस्ट रिपोर्टर

संस्थापक सदस्य,सतपक्ष पत्रकार मंच ।

9414349467

ई.मेल—brnews2003@gmail.com


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