उदासीनता व दुरव्यवहार से शाखा प्रबंधक ही लगा रहे हैं एसबीआई की साख़ को बट्टा


बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर। सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की साख़ को उसके ही कुछ कर्मचारी अपनी उदासीनता,कामचोरी और सीनाजोरी से लगातार बट्टा लगा रहे हैं,मामला और अधिक गम्भीर व विचारणीय तब हो जाता है जब ऐसा करने वाला कर्मचारी स्वयं उस शाखा का प्रबंधक हो। ताज़ा वाकया जुड़ा है विजय पथ मानसरोवर जयपुर स्थित एसबीआई की शाखा (SBIN0032160) के प्रबंधक पंकज अग्रवाल से। 

हुआ यूं कि बैंक के ही एक ग्राहक आयुष यादव के पास केवाईसी अपडेट कराने का मैसेज आया। 20 वर्षीय आयुष यादव एक विद्यार्थी हैं जब उन्होने केवासी अपडेट कराने संबंधी मैसेज का जिक्र अपने पत्रकार संबंधी अनिल यादव से जोकि संयोगवश घर पर आए हुए थे, किया। तय हुआ कि दो मिनट का काम है बैंक चल कर केवाईसी अपडेट करा लेते हैं। बैंक पहुँचने पर काफी देर में कम्प्यूटर से प्रिंट निकालकर के.वाई.सी. फार्म दिया गया,पहले से बैंक शाखा में फॉर्म तक मौजूद नहीं था,जब फार्म भर कर काउंटर पर दिया गया तो आधार व पैन कार्ड की फोटो कॉपी मांगी गई, आधार व पैन कार्ड थे परन्तु फोटो कॉपी नहीं थी तो आयुष के साथ आए पत्रकार संबंधी अनिल यादव ने काउन्टर पर बैठे एक अन्य कार्मिक से बैंक के प्रिंटर से ही कॉपी निकाल कर देने का निवेदन किया तो उन्होने उदासीनता पूर्वक बहाना बनाते हुए पहले तो कहा कि बैंक में रखे प्रिंटर में कॉपी की सुविधा ही नहीं है, फिर कहा कि इसमें इंक ही नहीं है और उसके बाद कहा कि प्रिंट साफ नहीं निकलता। खैर आयुष व पत्रकार संबंधी ने बहस नहीं की और  एसबीआई बैंक ​कार्मिकों के व्यवहार की तुलना निजी बैंकों से करते हुए बाजार से फोटो—कापी कराने के लिए निकल गए करीब एक किलोमीटर के चक्कर के बाद वे फोटो कॉपी करा कर लाए।   बाद में पता चला कि बैंक वालों ने केवाईसी हेतु जो फार्म दिया था वो भी गलत था और ग्राहक को ई.के.वाईसी हेतु नया फार्म भरना पड़ेगा । सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित बैंक की साख को बट्टा लगते देख,सुधार की आशा से पत्रकार अनिल यादव ने बैंक पहुँचकर बैंक के मैनेजर को इस व्यवस्था में सुधार हेतु सुझाव देने की नीयत से बैंक मैनेजर के बारे में जानकारी मांगी तो ज्ञात हुआ कि काउन्टर पर बैठे जिस व्यक्ति ने हमें टालने के लिए तीन—तीन झूठ बोले थे असल में वही बैंक का मैनेजर है। इस जानकारी के बाद जब पत्रकार अनिल यादव ने अपना विजिटिंग कार्ड आगे बढ़ाते हुए पूछा कि इतना बड़ा बैंक है, 5 मिनट में ग्राहक को आप सुविधा दे सकते थे तो फिर ​अकारण लोगों को विभिन्न बहानों से धक्के खिलाने का क्या मतलब है,यदि प्रिंटर में इंक नहीं है या कोई गड़बड़ है तो आपको अपने उच्च अधिकारियों को सूचित करना चाहिए क्योंकि इस तरह के व्यवहार के कारण ही लोगों का सार्वजनिक क्षेत्र के इतने बड़े बैंक एसबीआई से लगातार मोह भंग हो रहा है और लोगों को निजी बैंकों की ओर जाना पड़ रहा है। मामूली पत्रकार का कार्ड व इतना लम्बा भाषण सुनकर बैंक मैनेजर पंकज अग्रवाल का अहंकार जाग उठा और पत्रकार पर आरोप जड़ने के लिए बहाने ढूंढने लगा पहले कहा कि कार्ड देख लिया है,मैं भी बरकत नगर ही रहता हूँ,फिर कहा आप मुझे पत्रकारिता की धौंस दिखा रहे हो,फिर कहा मास्क ठीक से लगाओ,फिर कहा आपको दूसरा बैंक पसंद है तो आप वहीं जाओ। कुल मिलाकर पत्रकार के सुझाव को सहर्ष स्वीकाने की बजाय उनसे झगड़ने लगा,शिकायत करने की बात कहने पर शिकायत के प्रति भी बेपरवाही दिखाई । स्वयं का कार्ड देने से मना कर दिया लेकिन पत्रकार से वही कार्ड वापस मांगने लगा जिस कार्ड को बड़ी ही बेरूखी से कुछ ही देर पूर्व उसने वापस लौटा दिया था,शायद इसलिए कि अगर कोई बात हो तो पत्रकार के बारे में जानकारी जुटाकर उसपर कोई भी झूठा—सच्चा आरोप मढ़ सके। मगर वो इस मंशा में भी संभवत: सफल नहीं हो सकेंगें क्योंकि पत्रकार ने पूरे वाकये का टेप पहले ही तैयार कर लिया था जोकि फिलहाल बैस्ट रिपोर्टर कार्यालय में सुरक्षित है । एसबीआई बैंक के उच्च अधिकारियों से अपील है कि बैंक के ग्राहकों से मामूली सी बातों पर भी झगड़ने वाले ऐसे उदासीन,कामचोर व सीनाजोर शाखा प्रबंधक पर बैंक की छवि को बट्टा लगाने,ग्राहकों से साथ दुरव्यवहार करने और ग्राहकों को अनावश्यक बहाना बनाकर चक्कर कटवाने के बिन्दुओं के मध्यनज़र समुचित अनुशासनात्मक की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी बैंककर्मी की उदासीनता व दुरव्यवहार के चलते कोई भी ग्राहक सार्वजनिक क्षेत्र से मुँह मोड़ कर निजी क्षेत्र की ओर आकर्षित ना हो। 

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