प्रेरणास्पद परिचर्चा 'अमृतम्' में डॉक्टर जामदड़े और शालिनी ने सुनाई अपनी कहानी


बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर। आर्य ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेस के मेन कैंपस, कूकस में इंस्पिरेशनल टॉक सीरीज 'अमृतम्' का दूसरा एपिसोड आयोजित किया गया। इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अमृता मौर्य से साथ डॉक्टर अंशुमान जामदड़े (specially abled Dr. Anshuman Jamdade, Prof. & Head, Dept. of Oral Medicine and Radiology, Mahatma Gandhi Dental College and Hospital MGDCH) और दृष्टिबाधित एथलीट शालिनी चौधरी (Visually Impaired International Para Athlete) ने अपने जीवन की कहानी साझा किये। 

कार्यक्रम की शुरुआत में आर्य ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेस की वाईस चेयरपर्सन पूजा अग्रवाल ने मुख्य अतिथि संजय सरदाना व दोनों वक्ताओं को सम्मानित किया। इवेंट कोऑर्डिनेटर प्रतिमा पटनायक ने डॉक्टर जामदड़े और दृष्टिबाधित खिलाड़ी शालिनी चौधरी की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया। 


18 वर्षीय दृष्टिहीन एथलिट शालिनी चौधरी ने दौड़ में अब तक राष्ट्रीय स्तर के 11 मैडल  जीते हैं जिनमे 1 गोल्ड, 5 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज़ शामिल हैं। हाल ही में मार्च 2022 में भुबनेश्वर में  हुए राष्ट्रीय पारा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उसने 3 सिल्वर मैडल जीते हैं। वह एथलेटिक्स जूनियर चैंपियनशिप स्विट्ज़रलैंड और एशियाई यूथ पारा गेम्स बहरीन में भी भाग ले चुकी है। 

सामान्य बच्चों के साथ पढ़ते हुए वह 10 वीं और 12 वीं दोनों कक्षाओं में प्रथम आयी। शालिनी ने अमृता मौर्य के साथ चर्चा करते हुए बताया कि 8 वीं कक्षा में ब्रेल में लिखी उसकी परीक्षा कॉपी पढ़ने के लिए उसे ही बुलाया गया था क्योंकि टीचर को ब्रेल नहीं आता था। टॉक शो के दौरान शालिनी ने ब्रेल में लिखी अपनी कविता पढ़ कर सुनाई। शालिनी, ऐप के माध्यम से मोबाइल ऑपरेट करती है और ऐप से अपने कोर्स की पढ़ाई भी करती है। ऐप से ही उसने अंग्रेजी सीखी है। गाने की शौक़ीन शालिनी ने चर्चा के दौरान एक लोकगीत भी सुनाया।

परिचर्चा के दूसरे भाग में डॉक्टर अंशुमान जामदड़े ने अमृता मौर्य के साथ अपनी कहानी साझा की। बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन में बाएं पैर में पोलियो हो गया था जिसकी वजह से उन्हें चलने के लिए बैसाखियों की ज़रुरत पड़ी। लेकिन यह उनकी सफलता में कभी रुकावट नहीं बनी।  


 डॉक्टर जामदड़े ने चार तरह के हार्मोनों के बारे मे बताया जो अलग-अलग ख़ुशी के अवसर पर स्रावित होते हैं। स्वस्थ महसूस करना, मनचाही वस्तु की प्राप्ति होना, किसी ज़रूरतमंद की सहायता करना और अपनों के साथ वक़्त बिताना - जिनके पास इन चार में से एक भी कम है, उनकी ख़ुशी अधूरी है। उन्होंने शिक्षा को जीवन की पहली ज़रुरत बताया और आत्मविश्वास से जीने की प्रेरणा दी। 

उनके हिंदी गाने - 'रुक जाना नहीं तू कहीं हार के' और 'आनेवाला पल जाने वाला है' ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।


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