"रहने के लिए स्वस्थ ग्रह - सभी की आवश्यकता" : डॉ. संजीव रॉय

बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर (रिपोर्ट : आशा पटेल ) । विश्व स्वास्थ्य दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अप्रैल को 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की स्थापना  के वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। प्रत्येक विश्व स्वास्थ्य दिवस को एक क्षेत्र को प्रकाशित करने के लिए एक विषय चुना जाता है जिसका उद्देश्य डब्ल्यूएचओ के लिए प्राथमिक चिंता और दुनिया भर के लोगों का ध्यान केंद्रित करना है। इस साल चुना गया विषय "हमारा ग्रह, हमारा स्वास्थ्य" है, जिसका मतलब ग्रह और स्वास्थ्य के मध्य परस्पर जुड़ाव केंद्रित करना है । हमें स्वस्थ कल के लिए स्वच्छ हवा, पानी और भोजन की आवश्यकता है। 

93 करोड़ से अधिक लोग - विश्व जनसंख्या का 12% - अपने घर के बजट का कम से कम 10% स्वास्थ्य देखभाल के लिए खर्च करते हैं । आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग बड़े पैमाने पर बिन बीमा होने के कारण, इन आघात और तनाव के कारण, वर्तमान में हर साल लगभग करोड़ो लोगों को गरीबी की ओर धकेलता है। हालांकि राज्य सरकारी अभियानों के द्वारा का सूक्ष्म स्तर पर उनका बीमा करने का प्रबंधन सराहनीय रहा है, किन्तु सर्वोत्तम स्वास्थ्य देखभाल (या दिशानिर्देश) के लिए रोग-विशिष्ट खर्चों की सीमा के कारण विवादास्पद हैं। हमें अधिक व्यापक परिप्रेक्ष्य और सूक्ष्म-प्रबंधित होने की आवश्यकता है। हालांकि यह कानून और नीतियों का निष्पादन हो सकता है जो मूल कारणों को संबोधित करते हैं। 

डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि दुनिया भर में हर साल 1.3 करोड़ से अधिक मौतें पर्यावरणीय परिहार्य होने के कारण होती हैं। जलवायु परिवर्तन की प्रवृत्ति बिगड़ रही है।

जलवायु परिवर्तन - हवा, पानी, तापमान, भोजन, आश्रय, वृद्धि एलर्जी और संचालित पारिस्थितिकी में परिवर्तन आदि को प्रभावित करने मैं प्रमुख भूमिका निभाती है। प्रति वर्ष लगभग 250000 मौतें कुपोषण, मलेरिया, डायरिया और गर्मी के तनाव के कारण होती हैं । जलवायु परिवर्तन मानवता के सामने सबसे बड़ा खतरा है।

कोविड महामारी ने हमारे ग्रह की कोमलता, स्वास्थ्य प्रणाली और पर्यावरण की नाजुकता को उजागर कर दिया है, स्वास्थ्य प्रणाली और पर्यावरण जो इस ग्रह पर हर व्यक्ति को बीमारी के प्रति संवेदनशील बनाता है लेकिन बुजुर्गों और बच्चों, जातीय अल्पसंख्यक, आर्थिक रूप से कमजोर समुदाय, विकलांग व्यक्ति और अन्य स्वास्थ्य रोग से पीड़ित लोग में सबसे ख़राब परिणाम रहे। जैसे कोविड महामारी के खतरे का सामना सरकार ने अभूतपूर्व निधिकरण से किया और स्वास्थ्य देखभाल वितरण में तार्किक सुधार किये, पर्यावरण संकट को दूर करने के लिए समान प्रयासों की आवश्यकता है। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ जलवायु की रक्षा और जैव विविधता के संरक्षण पर ध्यान देना आवश्यक हैं। स्वच्छ और स्वस्थ जलवायु के लिए, वित्त पोषण, कानून और नीतियों का निष्पादन और लचीला समाजों के लिए पर्यावरण , यह मजबूती के माध्यम से हो सकता है। जयपुर जैसे बड़े शहर बदहाली का शिकार हो रहे हैं जैसे की वायु और ध्वनि प्रदूषण, तापमान में वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग), दुर्लभ स्वच्छ पानी, घटता भूमिगत जल स्तर और अंतत: सड़कों पर कूड़े का अंबार। प्रत्येक व्यक्ति सवाल करता हैं - "मैं क्या कर सकता हूँ" और "मैं कैसे कर सकता हूँ"? व्यक्तियों को सुधारों का समर्थन करने एवं पालन करने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य पेशेवरों को इस तरह के संक्रमण से सहायता, सहयोग, एक स्थायी लचीला और स्वस्थ दुनिया की आवश्यकता है

एक स्वस्थ कल एवं जलवायु की रक्षा के लिए, आइए हम सभी संकल्प लें और लक्ष्य की दिशा में काम करें।

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