जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन गुलाबी नगरी में बहुरंगी सत्रों में दिखी रोनक


बैस्ट रिपोर्टर न्यूज,जयपुर (रिपोर्ट : आशा पटेल)। 12 मार्च।  पॉवर-पैक्ड लाइनअप के साथ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के पिछले दिन भारतीय उपमहाद्वीप के प्रभाशाली वक्ताओं ने भाग लिया, जिनमें पुरस्कृत नोर्वेजियाई लेखक हान ग्रुए और लेखिका व स्याही की फाउंडर, मीता कपूर शामिल थे| सत्र ग्रुए के दिल को छू लेने वाले संस्मरण, आई लिव ए लाइफ लाइक योर्स, पर आधारित था, जिसमें “दुनिया में ‘मैं’ बने रहने पर” बात हुई| इसके बाद एक सत्र में लोकप्रिय लेखक पवन के. वर्मा की नई किताब, द ग्रेट हिन्दू सिविलाइजेशन पर चर्चा हुई| किताब में प्राचीन सभ्यता के कई गूढ़ पहलुओं को उभारा गया है| फेस्टिवल के तीसरे दिन ने इसी ऊर्जा को आगे बढ़ाया|

दुनिया के सबसे बड़े ‘हाइब्रिड’ लिटरेरी फेस्टिवल के तीसरे दिन की शुरुआत हुई नोबेल पुरस्कार से सम्मानित, लेखक और दलाई लामा के छात्र, राजीव मेहरोत्रा के ‘ध्यान’ सत्र से| सत्र में श्रोताओं को मन, तन और आत्मा के सम्बन्ध के बारे में बताया गया| मेहरोत्रा ने प्राणायाम, शरीर के सही पोस्चर और मन की शांति के लिए कुछ टिप्स दिए| तनावपूर्ण जीवन में दिल को सुकून पहुँचाने वाले इस सत्र के बाद, ‘द आह्वान प्रोजेक्ट’ ने संगीत के माध्यम से प्रेम, मानवता और विनम्रता के दर्शन को प्रस्तुत किया| 

• एक सत्र में, लेखक अनिरुद्ध कनिसेटी ने अपनी किताब, लॉर्ड्स ऑफ़ द डेक्कन: साउथर्न इंडिया फ्रॉम द चालुक्यास टू द चोलास पर चर्चा की| सत्र में उनके साथ थे लेखक और इतिहासकार मनु एस. पिल्लई| यह किताब दक्षिण भारत और समकालीन राजनीति और संस्कृति पर पड़ने वाले उसके परिणाम पर किये गए गहन अध्ययन का परिणाम है| अनिरुद्ध की किताब के बारे में मनु एस. पिल्लई ने कहा, “इस किताब की खासियत है कि ये मध्ययुगीन अन्तराल को भरती है|” दोनों लेखकों ने दक्कन के राजाओं और उनकी विरासत पर गंभीर चर्चा की|

• युद्ध पर आधारित एक सत्र में शामिल वक्ता थे: रोली बुक्स के फाउंडर व पब्लिशर, प्रमोद कपूर; नेवल हिस्ट्री प्रोजेक्ट के ऑफिसर-इन-चार्ज, श्रीकांत बी. केस्नुर और इंडिया टुडे मैगज़ीन के मैनेजिंग एडिटर, संदीप उन्नीथन| सत्र में वक्ताओं ने कपूर की किताब, 1946: नेवल अपराइजिंग दैट शुक द एम्पायर पर चर्चा की| किताब में ब्रिटिश इंस्ट्रूमेंट, नेवी के सम्बन्ध में भारत के खामोश, लेकिन महत्वपूर्ण इतिहास का वर्णन है| 

•आधुनिक भारत का विकास राष्ट्रवाद के ऐतिहासिक, सामाजिक-राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक अध्ययन का रूप है| साकेत सुमन की किताब, द सायकोलोजी ऑफ़ ए पेट्रियट, भारत का विचारोत्तेजक इतिहास प्रस्तुत करती है| लेखिका और अकादमिक मुकुलिका बनर्जी के साथ संवाद में, पैनल ने देश के वर्तमान और भविष्य पर अपने विचार रखे|

• एक अन्य सत्र में, इतिहासकार और लेखक मार्क डेविड बेअर ने अपनी किताब, द ओटोमंस: खांस, केसरस एंड कैलिफ्स पर इतिहासकार, लेखक और फेस्टिवल को-डायरेक्टर, विलियम डेलरिम्पल से चर्चा की| बेअर की किताब में पश्चिम की लैंगिकता, मूल, नरसंहार और इतिहास का वर्णन अजेय विश्व साम्राज्य के रूप में है| “30 साल पहले तक आपको कहीं ओटोमन रेस्टोरेंट और टीवी सीरीज नहीं मिलती थीं,” बेअर ने कहा| उन्होंने ये भी जोर दिया कि ओटोमंस बहुत विविधता भरा समूह था, जिसमें मंगोल, ग्रीक, क्रिश्चियन, इस्लाम और कुछ हद तक कट्टर इस्लामिक भी शामिल थे|

• एक जानकारीप्रद सत्र में, इतिहासकार और प्रसिद्ध लेखक मनु एस. पिल्लई ने अपनी नई किताब, फाल्स अलाइस: इंडिया’स महाराजास इन द ऐज ऑफ़ रवि वर्मा पर संसद सदस्य और बेस्टसेलिंग लेखक, शशि थरूर से चर्चा की| दोनों वक्ताओं ने भारत के महाराजाओं के इतिहास पर लेखिका और इतिहासकार इरा मुखोटी से संवाद किया| पिल्लई ने कहा कि उन्होंने ये किताब लिखने की चुनौती इसीलिए ली क्योंकि भारतीय उपमहाद्वीप का 40% भाग, अंग्रेजों के समय में भी, राजाओं के राज्य के अंतर्गत था| चर्चा के दौरान, पिल्लई ने कहा कि उन्होंने महाराजाओं की आपसी मित्रता को भ्रम इसलिए कहा, “क्योंकि कई मायनों में वो भी साम्राज्य का समर्थन करते थे”| किताब के बारे में, शशि थरूर ने कहा: “...ये बात वास्तव में लिखे जाने, पढ़े जाने के लायक है कि भारत के इतिहास में इन राजसी राज्यों की क्या भूमिका थी|”

• बैंक ऑफ़ बड़ोदा मुग़ल टेंट में आयोजित एक सत्र में एम्बेसडर नवदीप सूरी; राजनयिक प्रतिनिधि पेट्रीशिया ए. लासिना; भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त, एच.ई. बैरी ओ’फार्रेल; भूतपूर्व भारतीय राजनयिक और भारत के 32वें विदेश सचिव, विजय गोखले; और भारत में डिप्टी ब्रिटिश हाई कमिश्नर, यान थोम्प्सन शामिल थे| पैनल ने इंडो-पैसिफिक,  पर चर्चा की और बताया कि एक जैसी सोच वाले देशों को एकसाथ क्यों रहना चाहिए|

• साहित्य उत्सव में ‘टेलिंग इट लिखे इट इज’ नामक सत्र में, संसद सदस्य महुआ मोइत्रा; राजनयिक और लेखक पवन के. वर्मा से मीडिया और पब्लिशिंग की दिग्गज सुधा सदानंद ने संवाद किया| सत्र असहमति की ताकत पर आधारित था| वर्मा ने कहा, “...लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा यही है कि कोई एक व्यक्ति या समुदाय यह मानने लगे कि सच पर सिर्फ उनका ही राज है| ये संवाद पर विराम लगा देता है और सभ्य मतभेद की गुंजाइश लोकतंत्र की सबसे ज़रूरी चीज है|” चर्चा के दौरान, मोइत्रा ने ज़ोर दिया कि असहमति का दायरा सिकुड़ता जा रहा है, और किसी भी समाज के लिए ये सही नहीं है| 

• एक सत्र में शामिल वक्ता थे: जानवी इंडिया की फाउंडर व क्रिएटिव डायरेक्टर, ज्योतिका झालानी; फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा; प्रिंसिपल डिजाइनर मुकुल गोयल; आईपी लॉयर और स्ट्रेटेजिस्ट, साफिर आनंद; आईपी काउंसल हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड, विजी मलकानी| सत्र संचालन किया टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर, संजॉय के. रॉय ने| सत्र में साफिर आनंद की किताब, क्रिसालिस का लोकार्पण हुआ| कॉर्पोरेट के बड़े खिलाड़ियों की बात करती यह किताब एक कॉफ़ी टेबल बुक है| फेस्टिवल के बारे में बात करते हुए, मनीष मल्होत्रा ने कहा, “यहाँ आना मेरे लिए हमेशा ही ख़ुशी की बात होती है, क्योंकि इसे संजॉय ने दिल से तैयार किया है|” 

• एक अन्य सत्र में, डायरेक्टर आर्ट्स इंडिया, ब्रिटिश काउंसिल, जोनाथन केनेडी; आर्टएक्स कम्पनी की फाउंडर, रश्मि धन्वानी; टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर संजॉय के. रॉय से संवाद किया क्री फाउंडेशन की फाउंडर, अर्शिया सेठी ने| कला, संस्कृति और विकास क्षेत्र के सभी विशेषज्ञों ने भारत की क्रिएटिव इकॉनोमी पर कोविड-19 के प्रभाव की चर्चा की| चर्चा के दौरान, रॉय ने भारतीय स्वतंत्रता के 75 सालों पर ज़ोर देते हुए कहा, “...ब्रिटेन में, उदाहरण के लिए, क्रिएटिव इंडस्ट्री जीडीपी में 11.7% का योगदान देती है, इतना ही योगदान बैंक, फाइनेंसियल इंडस्ट्री, गैस और संसाधन उद्योग साथ में मिलकर दे पाते हैं|”

• फेस्टिवल के 15वें संस्करण में कवि, सांस्कृतिक सिद्धांतवादी और क्यूरेटर, रंजीत होस्कोटे को महाकवि कन्हैयालाल सेठिया पोएट्री अवार्ड 2022 से सम्मानित किया गया| होस्कोटे के कार्यों का अनेक भाषाओँ में अनुवाद हुआ है| महाकवि कन्हैयालाल सेठिया फाउंडेशन के सहयोग से दिया जाने वाला यह अवार्ड कवि की विलक्षण प्रतिभा को चिन्हित करता है| प्रतिष्ठित ज्यूरी में शामिल थे: नमिता गोखले, संजॉय के. रॉय, जयप्रकाश सेठिया, निरुपमा दत्त और सिद्धार्थ सेठिया| 


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