मेट्रो मानस आरोग्य अस्पताल को पीपीपी माॅडल से मुक्त कर सरकार करे संचालन

रिपोर्ट : आशा पटेल


मानसरोवर व आसपास के क्षेत्रीय जनता की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखकर बेशकीमती जमीन पर 5  साल में 40 करोड रूपये की लागत से बनकर तैयार हुए मानस आरोग्य अस्पताल को जब पिछली भाजपा सरकार पीपीपी माॅडल पर निजी संचालकों के हाथ सौंप रही थी, तभी से राजस्थान नागरिक मंच व जनपक्षीय संगठनों ने इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया था और सरकार के द्वारा ही संचालन किये जाने पर बेहद जोर दिया था परंतु राज्य सरकार ने इसकी घोर अनदेखी कर निजी संचालक मेट्रो के हाथ उसका संचालन सौंपा दिया था।

यहां एक बात उल्लेखनीय तौर पर देखी गई है कि मानस आरोग्य संस्थान जब से मेट्रो के संचालन में देकर "मेट्रो मास" बना है, न तो काॅरपोरेट ढंग से चल पाया और न ही सरकारी रह पाया। बीमारी दूर करने के ध्येय से बना यह अस्पताल खूद बीमार है और उसकी व्यवस्थाएं लकवाग्रस्त रही हैं। जबकि जयपुर का सवाई मानसिंह अस्पताल दिल्ली के एम्स के लगभग बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम रहा है और कोविड काल में जयपुर में नये खुले दूसरे स्वास्थ्य वि. वि. RUHS ने भी सराहनीय कार्य कर दिखाया है। क्षेत्र के अन्य सरकारी स्वास्थ्य सेवा संस्थान भी बेहतर प्रदर्शन करते रहे हैं तो मेट्रो मानस आरोग्य अस्पताल को भी सरकार क्योंकर अपने हाथों में लेकर संचालित कर सकती है।

"राजस्थान नागरिक मंच" के सचिव अनिल गोस्वामी का कहना है कि सरकार द्वारा पीपीपी मॉडल पर संचालन का हमारे द्वारा शुरुआत से ही विरोध किया जाता रहा है और वर्तमान में स्थानीय निवासियों द्वारा जयप्रकाश बुलचन्दनी के नेतृत्व में बनाई गई "मेट्रो मास संघर्ष समिति" के साथ  राजस्थान नागरिक मंच व जनपक्षीय संघठन राजस्थान सरकार से मांग करते है कि वह मेट्रो मास अस्पताल को अपने संचालन में लेने पर गंभीरता से विचार करे और मानसरोवर व आसपास के क्षेत्र के आमजन को निशुल्क व सस्ती स्वास्थ्य रक्षा संबंधी राहत प्रदान करने के लिए सकारात्मक निर्णय ले।