पत्रकार, कवि और लेखक मेघराज श्रीमाली नहीं रहे

                                    रिपोर्ट : आशा पटेल


पत्रकार, कवि, लेखक और राजस्थान के पाँच मुख्यमंत्रियों के प्रेस अटैची रहे मेघराज श्रीमाली नहीं रहे। वह 91 साल के थे। उनका निधन मंगलवार रात 11ः15 बजे अपने निवास स्थान जयपुर के वैशाली नगर में हो गया। 

स्व. श्रीमाली का जन्म 1931 में बीकानेर में हुआ । बीकानेर के डूंगर कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। तीन साल पूर्व उनका एक कविता संग्रह ‘फिर कविता का रूप बदलता’ भी प्रकाशित हुआ था।

उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में साप्ताहिक पत्र ‘ज्वाला’ से की थी जो 1960-70 के दशक में तीखी राजनीतिक टिप्पणियों और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध अभियान के रूप में जाना जाता था ।

बाद में वे जयपुर से निकलने वाले ‘दैनिक नवयुग’ से जुड़ गए तथा राष्ट्रदूत से भी संबद्ध रहे।

जब स्व. कर्पूरचंद कुलिश ने राजस्थान पत्रिका की  शुरुआत की तब स्व. श्रीमाली उनकी संपादकीय टीम में थे। पत्रिका में उन्होंने  ‘मंझधार में मिडलची’ कॉलम शुरू किया और कई  वर्षों तक लगातार लिखा। वे श्रमजीवी पत्रकार संघ के फाउंडर मेंबर भी रहे। 

सन् 1958 में राजकीय सेवा में जन संपर्क विभाग में नियुक्त किये गए। इसी दौरान प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों के साथ प्रेस अटैची के रूप में कार्य किया। उन्होंने राजस्थान नहर (इंदिरा गांधी नहर परियोजना) पर पहली डॉक्यूमेंट्री बनवाई। बांसवाड़ा, जोधपुर, जैसलमेर, उदयपुर और जयपुर में ज़िला जनसंपर्क अधिकारी रहे। श्रीमाली जी सन् 1991 में संयुक्त निदेशक के साथ कार्यवाहक निदेशक के रूप में कार्य करते हुए सेवा निवृत्त हुए।  वे विकास अध्ययन संस्थान से भी जुड़े रहे।

श्रीमाली जी ने टेलीविजन के लोकप्रिय धरावाहिक ‘बालिका वधु’ के दो हज़ार से अधिक एपीसोड के स्लोगन लिखे और बेहद लोकप्रिय हुए। 

वह अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। दो माह पूर्व ही उनकी धर्मपत्नी का भी स्वर्गवास हुआ था।

वे अपने पीछे प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना सुश्री प्रेरणा श्रीमाली, कॉरपारेट प्रबंधक मनोज श्रीमाली और ‘बालिका वधु‘ धारावाहिक के लेखक के रूप में ख्याति अर्जित करने वाले लेखक पूर्णेन्दु शेखर को छोड़ कर गए हैं।

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